बदलते मौसम में स्वांस सम्बन्धी रोगों से रहें सवधान
वर्षा
इस मौसम में रात को सोते समय पूरे कपडे पहन कर सोना चाहिऎ जिससे शरीर का अधिक से अधिक भाग ढका रहे। बासी, ठण्डा व खट्टा खाने व पीने से बचना चाहिऎ। जहाँ पर अधिक धूल मिट्टी व प्रदूषण वाली जगह हो वहाँ पर जाने से बचना चाहिए। बच्चे सोते समय अधिक करवट बदलते हैं इसलिये उनका ज्यादा ध्यान रखना चाहिऎ कि वो उघड ना पायें। होम्योपैथिक दवाईयों द्वारा स्वास सम्बन्धी रोगों का सम्पूर्ण उपचार किया जा सकता है बच्चों की बिमारियों में होम्योपैथिक दवाइयां अधिक तेजी के कार्य करती हैं। जिनमें प्रमुख रूप से ब्रायोनिया अल्बा, आर्सेनिक अल्ब, बेलाडोना, एन्टिम टार्ट, एकोनाइट, आदि उपयोग में लायी जाती हैं। अस्थमा(दमा) होने पर होम्योपैथिक के कुच्छ मदर टिन्चर का मिश्रण निरन्तर लेने से बिमारी का समूल इलाज किया जा सकता
है।
