इस्लाम व कुरान पर भारत के महापुरुषों द्वारा दिये गये क्रांतिकारी विचार

गुरु नानक के विचार- मुसलमान सैयद, शेख, मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गये थे। जो लोग मुसलमान नहीं बनते थे उनके शरीर में कील ठोककर कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया कर मरवा दिया जाता था। नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक - पैन इस्लमिक बैंक, पृ्ष्ठ ८०

समर्थ गुरु रामदास जी 1608-1680- छ्त्रपति शिवाजी महाराज के गुरु अपने ग्रन्थ-दास बोध में लिखते हैं कि- मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार कफिर "हिन्दु" नारियों से बलात्कार किये जिससे दु:खी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली। मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किये गये एवं अगणित बच्चे अपने माँ बाप को देखकर चीखते रहे। मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे, उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया अथवा आग से जला दिया।
-डा. एस। डी। कुलकर्णी कृ्त एन्काउंटर विद इस्लाम पृ्ष्ठ 267-268

राजा मोहन राय 1772-1833- मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुकम हैं और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है। इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओ पर अत्याधिक अत्याचार किये, उनका वध किया, लूटा व उन्हें गुलाम बनाया। - वाड्मय राजा राममोहन राय पृ्ष्ठ ७२६- ७२७

आपका सहयोग चाहिये

Dear Brothers,As you all know that Jammu Kashmir State Government has withdrawn the land allocated to Shri Amarnath Shrine Board for temporary construction. This withdrawal is result of usual pressurisation of fundamentalist Muslims of valley, who wants to make ‘Dar Ul Mustafa’. Fundamentalist Muslim leaders of valley have always been biased with Hindu majority areas. Central government is not only soft with separatists but also boosting their morals anyhow.Muslim Mafia-Police have peed on the dead body of Kuldeep whom they killed in Jammu! That’s the way they abuse every Hindu they kill everyday. They disconnected the electricity of Hindu areas. Hindu kids are starving for milk and food. No food, No Medicines, No electricity, No civic facilities. Today, Jammu Hindus are already on streets, shading their blood. Rest of Hindus are supposed to be Mute? If No, then support Nationwide ‘chakka jam’ movement called by Vishwa Hindu Parishad on 13th August, and make it huge success. Support not only the Hindus of Jammu but also Nationalism.

हम क्या और क्यों कर रहे हैं |

बुद्धवार 11/6/2008 प्रातः जैसे ही अखबार का पन्ना पलटा एक युवती के अपहरण का समाचार पढा। यह घाटना एक त्यागी परिवार से जुडी होने के करण मेरी रूची इस खबर मे कुछ अधिक ही रही, रात होते-होते इस समाचार की संद्धिग्धता का लडकी की बरामदगी के साथ पटाक्षेप भी हो गया। समचारों में बताया गया कि लड्की का उस मुस्लिम लडके के द्वारा अपहरण किया गया जिससे लडकी ने वर्ष भर पहले शादी कर रखी थी। समझने वाले इस समचार को कैसे समझते हैं यह उन का अपना मत है, मुझे इस की गहराई में जाने की आवश्यक्ता भी नहीं। पूरी खबर जानने के बाद मैं यह सोचने को विवश हो रहा हूं कि हमारी पीढी किस ओर जा रही है, गलती कहां हो रही है?
पद, प्रतिष्ठा, धनवान व बडा आदमी बनने की क्या-क्या कीमत हमको चुकनी पड सकती है यह इस दौड में सम्मलित होने से पहले विचार कर लेना चाहिए। धनवान, पद-प्रतिष्ठावान होना न तो कोई अपराध है न ही कोई दोष है, किन्तु इनको प्राप्त करने का कोई स्पष्ट उद्धेश्य होना चाहिए कि हम यह सब क्यों, किसके लिए और कैसे प्राप्त कर रहे हैं। भौतिकतावाद की दौड़ मैं दौड़ते-दौडते हम अपना उद्देश्य तो ध्यान रखते हैं लेकिन अपने कर्तव्य भूल जाते हैं। जिसकी परिणीती में परिवार का ताना बाना क्षिन्न-भिन्न होने लगता है, वही परीजन जिनके लिये हम सब कुछ करना चाहते हैं हमारे विरोधी रहते हैं। हम अपनों की सभी आवश्यकता की पूर्ती का माध्यम पैसा व भौतिक सुखसाधन ही समझते हैं तथा उनकी भावनाओं को नहीं समझ पाते हैं। यही वजह घर में कलह का करण बनती है।जिसका सबसे बुरा असर बच्चों पर पडता है। बच्चे इस मामले में अधिक संवेदनशील होते हैं उनका अचेतन मन बडों की अपेक्षा अधिक सक्रिय होता है, इसीलिए घर में तथा आस-पास में हो रही घटाओं का बच्चों के मन पर गहरा असर होता है। बच्चे जो कुछ घर में पाना चाहते हैं यदि वह घर में नही मिलता तो उसे बाहर पाने का प्रयास करते हैं। यह सब कुछ वो जानपूछ कर नही करते बल्कि अचेतन मन की सक्रियता के कारण अपने उपर नियंत्रण न होने की वजह से उनके द्वारा स्वतः ही होता रहता है। बच्चों के भटकाव यही सबसे बडा कारण होता है। माता-पिता को यह सोचना चहिऎ कि बच्चों के लिये भौतिक सम्पदा की अपेक्षा सदगुण, सदविचार, सदचरित्र व सुसंकार की सम्पत्ति, अधिक मूल्यवान होती है, जिसका कोइ कभी अहरण नहीं कर सकता।

  © Blogger template 'Ultimatum' by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP